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महाभारत 6.40.40
न तदस्ति पृथिव्यां वा दिवि देवेषु वा पुनःसत्त्वं प्रकृतिजैर्मुक्तं यदेभिः स्यात्त्रिभिर्गुणैः
na tadasti pṛthivyāṃ vā divi deveṣu vā punaḥsattvaṃ prakṛtijairmuktaṃ yadebhiḥ syāttribhirguṇaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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