महाभारत 6.40.42
शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव चज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्
śamo damastapaḥ śaucaṃ kṣāntirārjavameva cajñānaṃ vijñānamāstikyaṃ brahmakarma svabhāvajam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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