महाभारत 6.40.56
सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयःमत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम्
sarvakarmāṇyapi sadā kurvāṇo madvyapāśrayaḥmatprasādādavāpnoti śāśvataṃ padamavyayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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