महाभारत 6.40.64
सर्वगुह्यतमं भूयः शृणु मे परमं वचःइष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्
sarvaguhyatamaṃ bhūyaḥ śṛṇu me paramaṃ vacaḥiṣṭo'si me dṛḍhamiti tato vakṣyāmi te hitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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