महाभारत 6.40.69
न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमःभविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि
na ca tasmānmanuṣyeṣu kaścinme priyakṛttamaḥbhavitā na ca me tasmādanyaḥ priyataro bhuvi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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