महाभारत 6.40.7
नियतस्य तु संन्यासः कर्मणो नोपपद्यतेमोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः
niyatasya tu saṃnyāsaḥ karmaṇo nopapadyatemohāttasya parityāgastāmasaḥ parikīrtitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें