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महाभारत 6.41.44
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
ततो युधिष्ठिरो वाक्यं भीष्मस्य कुरुनन्दनशिरसा प्रतिजग्राह भूयस्तमभिवाद्य च
tato yudhiṣṭhiro vākyaṃ bhīṣmasya kurunandanaśirasā pratijagrāha bhūyastamabhivādya ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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