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महाभारत 6.41.75
तुष्टोऽस्मि पूजितश्चास्मि यत्काङ्क्षसि तदस्तु तेअनुजानामि चैव त्वां युध्यस्व जयमाप्नुहि
tuṣṭo'smi pūjitaścāsmi yatkāṅkṣasi tadastu teanujānāmi caiva tvāṃ yudhyasva jayamāpnuhi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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