महाभारत 6.41.97
प्रत्यपद्यन्त ते सर्वे रथान्स्वान्पुरुषर्षभाःततो व्यूहं यथापूर्वं प्रत्यव्यूहन्त ते पुनः
pratyapadyanta te sarve rathānsvānpuruṣarṣabhāḥtato vyūhaṃ yathāpūrvaṃ pratyavyūhanta te punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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