महाभारत 6.43.35
बाह्लीकं तु रणे क्रुद्धं क्रुद्धरूपो विशां पतेअभ्यद्रवदमेयात्मा धृष्टकेतुर्महारथः
bāhlīkaṃ tu raṇe kruddhaṃ kruddharūpo viśāṃ pateabhyadravadameyātmā dhṛṣṭaketurmahārathaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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