महाभारत 6.43.57
सुशर्माणं नरव्याघ्रं चेकितानो महारथःअभ्यद्रवत्सुसंक्रुद्धः पाण्डवार्थे पराक्रमी
suśarmāṇaṃ naravyāghraṃ cekitāno mahārathaḥabhyadravatsusaṃkruddhaḥ pāṇḍavārthe parākramī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें