महाभारत 6.43.69
विन्दानुविन्दावावन्त्यौ कुन्तिभोजं महारथम्ससेनं ससुतं वीरं संससज्जतुराहवे
vindānuvindāvāvantyau kuntibhojaṃ mahārathamsasenaṃ sasutaṃ vīraṃ saṃsasajjaturāhave
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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