महाभारत 6.44.12
विनेदुर्भिन्नमर्माणो निपेतुश्च गतासवःप्राद्रवन्त दिशः केचिन्नदन्तो भैरवान्रवान्
vinedurbhinnamarmāṇo nipetuśca gatāsavaḥprādravanta diśaḥ kecinnadanto bhairavānravān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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