महाभारत 6.44.28
पुंस्त्वादभिमदत्वाच्च केचिदत्र महागजाःसाश्वारोहान्हयाञ्जघ्नुः करैः सचरणैस्तथा
puṃstvādabhimadatvācca kecidatra mahāgajāḥsāśvārohānhayāñjaghnuḥ karaiḥ sacaraṇaistathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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