महाभारत 6.45.25
स राजतो महास्कन्धस्तालो हेमविभूषितःसौभद्रविशिखैश्छिन्नः पपात भुवि भारत
sa rājato mahāskandhastālo hemavibhūṣitaḥsaubhadraviśikhaiśchinnaḥ papāta bhuvi bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें