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महाभारत 6.45.36
तस्य वारणराजस्य जवेनापततो रथीशल्यो निवारयामास वेगमप्रतिमं रणे
tasya vāraṇarājasya javenāpatato rathīśalyo nivārayāmāsa vegamapratimaṃ raṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंतस्य वारणराजस्य जवेनापततो रथीशल्यो निवारयामास वेगमप्रतिमं रणे
tasya vāraṇarājasya javenāpatato rathīśalyo nivārayāmāsa vegamapratimaṃ raṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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