महाभारत 6.46.9
आत्मनो बुद्धिदौर्बल्याद्भीष्ममासाद्य केशववनं यास्यामि गोविन्द श्रेयो मे तत्र जीवितुम्
ātmano buddhidaurbalyādbhīṣmamāsādya keśavavanaṃ yāsyāmi govinda śreyo me tatra jīvitum
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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