महाभारत 6.47.12
तमन्वयान्महेष्वासो भारद्वाजः प्रतापवान्कुन्तलैश्च दशार्णैश्च मागधैश्च विशां पते
tamanvayānmaheṣvāso bhāradvājaḥ pratāpavānkuntalaiśca daśārṇaiśca māgadhaiśca viśāṃ pate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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