महाभारत 6.47.5
एकैकशः समर्था हि यूयं सर्वे महारथाःपाण्डुपुत्रान्रणे हन्तुं ससैन्यान्किमु संहताः
ekaikaśaḥ samarthā hi yūyaṃ sarve mahārathāḥpāṇḍuputrānraṇe hantuṃ sasainyānkimu saṃhatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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