महाभारत 6.47.6
अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम्पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं पार्थिवसत्तमाः
aparyāptaṃ tadasmākaṃ balaṃ bhīṣmābhirakṣitamparyāptaṃ tvidameteṣāṃ balaṃ pārthivasattamāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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