महाभारत 6.48.11सादितध्वजनागाश्च हतप्रवरवाजिनःविप्रयातरथानीकाः समपद्यन्त पाण्डवाःsāditadhvajanāgāśca hatapravaravājinaḥviprayātarathānīkāḥ samapadyanta pāṇḍavāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें