Loading
महाभारत 6.48.38
उभौ श्वेतहयौ राजन्संसक्तौ दृश्य पार्थिवाःसिंहनादान्भृशं चक्रुः शङ्खशब्दांश्च भारत
ubhau śvetahayau rājansaṃsaktau dṛśya pārthivāḥsiṃhanādānbhṛśaṃ cakruḥ śaṅkhaśabdāṃśca bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें