महाभारत 6.48.46तथैवार्जुनमुक्तानि शरजालानि भागशःगाङ्गेयशरनुन्नानि न्यपतन्त महीतलेtathaivārjunamuktāni śarajālāni bhāgaśaḥgāṅgeyaśaranunnāni nyapatanta mahītaleइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें