महाभारत 6.48.68
त्वदीयास्तु ततो योधाः पाण्डवेयाश्च भारतअन्योन्यं समरे जघ्नुस्तयोस्तत्र पराक्रमे
tvadīyāstu tato yodhāḥ pāṇḍaveyāśca bhārataanyonyaṃ samare jaghnustayostatra parākrame
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें