महाभारत 6.49.12
तं च दीप्तं शरं घोरमायान्तं मृत्युमात्मनःचिच्छेद शरवृष्टिं च भारद्वाजे मुमोच ह
taṃ ca dīptaṃ śaraṃ ghoramāyāntaṃ mṛtyumātmanaḥciccheda śaravṛṣṭiṃ ca bhāradvāje mumoca ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें