महाभारत 6.49.15
तामापतन्तीं सहसा शक्तिं कनकभूषणाम्त्रिधा चिक्षेप समरे भारद्वाजो हसन्निव
tāmāpatantīṃ sahasā śaktiṃ kanakabhūṣaṇāmtridhā cikṣepa samare bhāradvājo hasanniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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