महाभारत 6.49.17
शरवर्षं ततस्तं तु संनिवार्य महायशाःद्रोणो द्रुपदपुत्रस्य मध्ये चिच्छेद कार्मुकम्
śaravarṣaṃ tatastaṃ tu saṃnivārya mahāyaśāḥdroṇo drupadaputrasya madhye ciccheda kārmukam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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