महाभारत 6.49.23
रुधिराक्तौ ततस्तौ तु शुशुभाते नरर्षभौवसन्तसमये राजन्पुष्पिताविव किंशुकौ
rudhirāktau tatastau tu śuśubhāte nararṣabhauvasantasamaye rājanpuṣpitāviva kiṃśukau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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