महाभारत 6.49.37
ततो दुर्योधनो राजा कलिङ्गं समचोदयत्सैन्येन महता युक्तं भारद्वाजस्य रक्षणे
tato duryodhano rājā kaliṅgaṃ samacodayatsainyena mahatā yuktaṃ bhāradvājasya rakṣaṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें