महाभारत 6.5.11
त्रसानां खलु सर्वेषां श्रेष्ठा राजञ्जरायुजाःजरायुजानां प्रवरा मानवाः पशवश्च ये
trasānāṃ khalu sarveṣāṃ śreṣṭhā rājañjarāyujāḥjarāyujānāṃ pravarā mānavāḥ paśavaśca ye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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