महाभारत 6.5.14
गौरजो मनुजो मेषो वाज्यश्वतरगर्दभाःएते ग्राम्याः समाख्याताः पशवः सप्त साधुभिः
gaurajo manujo meṣo vājyaśvataragardabhāḥete grāmyāḥ samākhyātāḥ paśavaḥ sapta sādhubhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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