महाभारत 6.5.18एषां विंशतिरेकोना महाभूतेषु पञ्चसुचतुर्विंशतिरुद्दिष्टा गायत्री लोकसंमताeṣāṃ viṃśatirekonā mahābhūteṣu pañcasucaturviṃśatiruddiṣṭā gāyatrī lokasaṃmatāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें