महाभारत 6.50.2चरन्तं गदया वीरं दण्डपाणिमिवान्तकम्योधयामास समरे कलिङ्गः सह सेनयाcarantaṃ gadayā vīraṃ daṇḍapāṇimivāntakamyodhayāmāsa samare kaliṅgaḥ saha senayāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें