महाभारत 6.50.75
एवं स तान्यनीकानि कलिङ्गानां पुनः पुनःबिभेद समरे वीरः प्रेक्ष्य भीष्मं महाव्रतम्
evaṃ sa tānyanīkāni kaliṅgānāṃ punaḥ punaḥbibheda samare vīraḥ prekṣya bhīṣmaṃ mahāvratam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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