महाभारत 6.53.26
एते समरदुर्धर्षाः सिंहतुल्यपराक्रमाःपाण्डवानामनीकानि बभञ्जुः स्म पुनः पुनः
ete samaradurdharṣāḥ siṃhatulyaparākramāḥpāṇḍavānāmanīkāni babhañjuḥ sma punaḥ punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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