महाभारत 6.53.32
तथैव पाण्डवाः सर्वे महत्या सेनया सहद्रोणभीष्मौ रणे शूरौ प्रत्युद्ययुररिंदमौ
tathaiva pāṇḍavāḥ sarve mahatyā senayā sahadroṇabhīṣmau raṇe śūrau pratyudyayurariṃdamau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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