महाभारत 6.53.3
एकाग्रमनसो भूत्वा पाण्डवानां वरूथिनीम्बभञ्जुर्बहुशो राजंस्ते चाभज्यन्त संयुगे
ekāgramanaso bhūtvā pāṇḍavānāṃ varūthinīmbabhañjurbahuśo rājaṃste cābhajyanta saṃyuge
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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