महाभारत 6.53.9
सेनाग्रादभिनिष्पत्य प्रायुध्यंस्तत्र मानवाःउभयोः सेनयो राजन्व्यतिषक्तरथद्विपाः
senāgrādabhiniṣpatya prāyudhyaṃstatra mānavāḥubhayoḥ senayo rājanvyatiṣaktarathadvipāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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