महाभारत 6.55.31
यो यो भीष्मं नरव्याघ्रमभ्येति युधि कश्चनमुहूर्तदृष्टः स मया पातितो भुवि दृश्यते
yo yo bhīṣmaṃ naravyāghramabhyeti yudhi kaścanamuhūrtadṛṣṭaḥ sa mayā pātito bhuvi dṛśyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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