महाभारत 6.55.48
ततस्तत्पुनरावृत्तं युधिष्ठिरबलं महत्दृष्ट्वा पार्थं महाबाहुं भीष्मायोद्यन्तमाहवे
tatastatpunarāvṛttaṃ yudhiṣṭhirabalaṃ mahatdṛṣṭvā pārthaṃ mahābāhuṃ bhīṣmāyodyantamāhave
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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