महाभारत 6.56.12
ततो महावेगसमाहतानि; भेरीसहस्राणि विनेदुराजौशङ्खस्वना दुन्दुभिनिस्वनाश्च; सर्वेष्वनीकेषु ससिंहनादाः
tato mahāvegasamāhatāni; bherīsahasrāṇi vinedurājauśaṅkhasvanā dundubhinisvanāśca; sarveṣvanīkeṣu sasiṃhanādāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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