महाभारत 6.6.2
प्रमाणं च प्रमाणज्ञ पृथिव्या अपि सर्वशःनिखिलेन समाचक्ष्व काननानि च संजय
pramāṇaṃ ca pramāṇajña pṛthivyā api sarvaśaḥnikhilena samācakṣva kānanāni ca saṃjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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