महाभारत 6.61.1
धृतराष्ट्र उवाच · dhṛtarāṣṭra uvāca
भयं मे सुमहज्जातं विस्मयश्चैव संजयश्रुत्वा पाण्डुकुमाराणां कर्म देवैः सुदुष्करम्
bhayaṃ me sumahajjātaṃ vismayaścaiva saṃjayaśrutvā pāṇḍukumārāṇāṃ karma devaiḥ suduṣkaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें