महाभारत 6.61.30
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
शृणु राजन्वचो मह्यं यत्त्वां वक्ष्यामि कौरवबहुशश्च ममोक्तोऽसि न च मे तत्त्वया कृतम्
śṛṇu rājanvaco mahyaṃ yattvāṃ vakṣyāmi kauravabahuśaśca mamokto'si na ca me tattvayā kṛtam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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