महाभारत 6.62.23
एवं विदित्वा तत्त्वार्थं लोकानामीश्वरेश्वरःवासुदेवो नमस्कार्यः सर्वलोकैः सुरोत्तमाः
evaṃ viditvā tattvārthaṃ lokānāmīśvareśvaraḥvāsudevo namaskāryaḥ sarvalokaiḥ surottamāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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