महाभारत 6.62.34
राजन्सत्त्वमयो ह्येष तमोरागविवर्जितःयतः कृष्णस्ततो धर्मो यतो धर्मस्ततो जयः
rājansattvamayo hyeṣa tamorāgavivarjitaḥyataḥ kṛṣṇastato dharmo yato dharmastato jayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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