महाभारत 6.62.8मानुषं लोकमातिष्ठ वासुदेव इति श्रुतःअसुराणां वधार्थाय संभवस्व महीतलेmānuṣaṃ lokamātiṣṭha vāsudeva iti śrutaḥasurāṇāṃ vadhārthāya saṃbhavasva mahītaleइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें