महाभारत 6.63.14
एष माता पिता चैव सर्वेषां प्राणिनां हरिःपरं हि पुण्डरीकाक्षान्न भूतं न भविष्यति
eṣa mātā pitā caiva sarveṣāṃ prāṇināṃ hariḥparaṃ hi puṇḍarīkākṣānna bhūtaṃ na bhaviṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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