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महाभारत 6.63.19
यश्चैवैनं भयस्थाने केशवं शरणं व्रजेत्सदा नरः पठंश्चेदं स्वस्तिमान्स सुखी भवेत्
yaścaivainaṃ bhayasthāne keśavaṃ śaraṇaṃ vrajetsadā naraḥ paṭhaṃścedaṃ svastimānsa sukhī bhavet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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