महाभारत 6.64.12
तमब्रवीन्महाराज भीष्मः शांतनवः पुनःमाहात्म्यं ते श्रुतं राजन्केशवस्य महात्मनः
tamabravīnmahārāja bhīṣmaḥ śāṃtanavaḥ punaḥmāhātmyaṃ te śrutaṃ rājankeśavasya mahātmanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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